बाड़मेर में थार महोत्सव – एक परिचय
बाड़मेर के पुरातत्व, ऐतिहासिक, धार्मिक, दर्शनीय स्थलों के प्रचार- प्रसार करने, बाड़मेर की लोक कला एवं संस्कृति को अक्ष्क्षुण बनाये रखने, हस्तशिल्प उद्योग का प्रचार-प्रसार करते हुए औद्योगिक स्तर में विकास करने एवं बाड़मेर को अन्तर्राष्ट्रीय मंच पर विशिष्ट स्थान प्रदान करने के उद्देश्य में जिला प्रशासन द्वारा पर्यटन विभाग के सहयोग में वर्ष 1986 से बाड़मेर थार समारोह का आयोजन प्रारम्भ किया गया था, फलस्वरूप बाड़मेर के अनेक लुप्त प्राय: पुरातत्व, धार्मिक, ऐतिहासिक, धार्मिक एवं अन्य दर्शनीय स्थलों, लोककला, हस्तशिल्प एवं प्रकृति द्वारा निर्मित स्थलों का विकास प्रारम्भ हुआ।
तीन दिवसीय समारोह के दौरान पर्यटकों के लिए लोक –संगीत के कार्यक्रम, हस्तकलाओं का प्रदर्शन,श्रृंगारिक ऊटों के करतब,मि.थार एवं मि.क्वीन थार जैसी रोचक प्रतिस्पर्द्धाओं को शामिल किया जाता हैं।
बाड़मेर थार समारोह में जिला प्रशासन – पर्यटन विभाग के अतिरिक्त क्षेत्र की विभिन्न नगरपालिकाओं, समस्त राजकीय, अर्द्धशासकीय एवं निजी प्रतिष्ठानों के अलावा जनप्रतिनिधियों, पत्रकारों, स्वेच्छिक संगठनों, गणमान्य नागरिकों एवं विकास के उद्देश्यों को पूरा करने के प्रयास निरन्तर हैं। वर्तमान में बाड़मेर थार समारोह अपनी अलग पहचान बना रहा है।
आयोजन के प्रथम दिवस पर शोभा यात्रा में पारम्परिक वेशभूषा में लोक कलाकार, मंगल कलश लिए बालिकाएँ, श्रृंगारित ऊँट, राजस्थानी लोक–धुनों को बजाते हुए बैण्ड समूह, बैलगाडियों पर गायन वादन करते लोक कलाकार एवं मार्ग पर नृत्य प्रस्तुत करती नृत्यागंनाएँ जब शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरती हैं तो स्थान-स्थान पर स्वागत-द्वारों में उनका उत्साह वर्धक स्वागत प्राप्त करती आदर्श स्टेडियम में पहुँचती हैं, जहाँ स्टेज पर मि. थार, मि. क्वीन, साफा बांध, लम्बी मूछ आदि रोचक प्रतिस्पर्धात्मक प्रतियोगिताएँ आयोजित होती हैं।
पुरातत्व महत्व के प्रचीन वैभवशाली ऐतिहासिक स्थल किराडू पर भजन संध्या से वीरान पैंड. मंदिरों में जीवन संवारती प्रतीत होती हैं।
तृतीय दिवस रेगिस्तान के जहाज ऊँटों द्वारा किए जाने वाले करतब एवं ऊंट की पीठ पर बैठकर रणबांकुरों द्वारा खेले जाने वाले खेल रोमांचक होते हैं।
तीन दिवसीय समारोह में महाबार के रेतीले धोरों पर ऊंट सवारी का आनन्द एवं सांस्कृतिक संध्या में राजस्थानी लोकगीत, लोकनृत्य कार्यक्रमों से हजारों देशी दर्शक एवं विदेशी पर्यटक मंत्र – मुग्ध हो जाते हैं।
बाड़मेर शहर में स्थित धार्मिक उपासना स्थल :-
हिन्दू :- 1.गढमंदिर (जगदम्बा), आजाद चौक, बाड़मेर।
2.हनुमान मंदिर, हनुमान चौक, सदर बाजार, बाड़मेर।
3.गोरधननाथ वैष्णो मंदिर, जोशियों का वास, बाड़मेर।
4.बालार्क प्रभु सूर्य मंदिर, जोशियों का वास, बाड़मेर।
5.गणेश मंदिर, हनुमान टेकरी, बाड़मेर।
6.दैवी चामुण्डा मंदिर, सदर बाजार, बाड़मेर।
मुस्लिम:-1.जामा मस्जिद, गांधी चौक, तेलियों का मौहल्ला, बाड़मेर।
2.जामिया इस्लामिया मदरसा एवं ईदगाह, कृषि मण्डी रोड. बाड़मेर।
3.मुस्लिम मुसाफिर खाना मदरसा, तेलियों का मौहल्ल, बाड़मेर।
जैंन - 1.पार्श्वनाथ जैन मंदिर, खागल मौहल्ला, बाड़मेर।
2.कुशल दादावाड़ी, गर्ल्स स्कूल के पीछे, माल गोदाम रोड़, बाड़मेर।
सिक्ख:- 1. प्रार्थना गृह नेहरू नगर, बाड़मेर।
बाड़मेर पहुंच मार्ग एवं साधन
सड़क मार्ग :-
बाड़मेर भारत के प्रमुख शहर जोधपुर, उदयपुर, दिल्ली के साथ रेल एवं सड़क मार्ग एवं जोधपुर, जयपुर, बीकानेर, जैसलमेर, माउन्टआबू, हरिद्वार एवं गुजरात, महाराष्टª के प्रमुख शहर अहमदाबाद, सुरत, पुना, बुम्बई से सड़क मार्ग से जुड़ा हुआ है।
वायु मार्ग :-
नजदीकी वायु सेवा केन्द्र जोधपुर में 220 कि.मी. की दूरी पर स्थित है।
रेल मार्ग :-
बाड़मेर से जोधपुर, जयपुर, दिल्ली एवं रास्ते के शहरों हेतु रेल सेवा उपलब्ध है। बाड़मेर से मुनाबाब होकर पाकिस्तान में रेल से प्रवेश मार्ग शीघ्र प्रारम्भ होने पर है।
बाड़मेर रेल्वे समय सारिणी बाड़मेर रेल्वे पूछताछ कार्यालय :- 02982 - 220131/
अधीक्षक - 220146,(का) 223331(नि)
बाड़मेर में परिवहन सुविधाऍं :-
जीप, कार, टैक्सी विभिन्न टेªवल एजेन्सी के मार्फत किराये पर ली जा सकती है, जिसका किराया रूपये 4/- से 5/- एवं ए.सी. सहित किराया रू. 5/- से 6/- प्रति किलोमीटर देय है। टेªवल एजेन्सी एवं टूर ऑपरेटर्स से निजी सम्पर्क कर किराया तय किया जाता है।
ऑटो रिक्शा बिना मीटर के ऑटो रिक्शा नगर के प्रमुख स्थानो पर किराये पर उपलब्ध है, जिनमे नगर पालिका सीमा क्षेत्र के लिए कम से कम रूपये 10/- एवं अधिक से अधिक रू. 30/- तक किराया देय है।
सड़क मार्ग बस सेवा :- बाड़मेर से विभिन्न स्थानों तक के लिए सड़क मार्ग यात्रा सुविधा के अन्तर्गत जोधपुर, जयपुर, दिल्ली, हरिद्वार, जैसलमेर, आबू, बीकानेर, जालौर, सूरत, पूना, अहमदबाद, मुम्बई के लिए एक्सप्रेस, डीलक्स राजकीय एवं निजी बस सेवा सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
1. राजकीय बस स्टैण्ड, कचहरी रोड़, विवेकानन्द सर्किल, बाड़मेर, से संचालित राजस्थान राज्य पथ परिवहन बस सेवा समय सारिणी
मुख्य आगार प्रबन्धक :- 02982-224698 एवं 220538 पूछताछ :- 220199
बाड़मेर शहर में स्थित ऐतिहासिक, धार्मिक दर्शनीय पर्यटक स्थल
1. बांकल माता गढ मन्दिर :- बाड़मेर शहर के पश्चिमी छोर पर 675 फीट ऊंची पहाड़ी पर 16 वीं शताब्दी का प्राचीन गढ (छोटा किला) था, जिसे बाड़मेर गढ कहा जाता था, जिसके अवशेष आज भी विद्यमान हैं। इसी पहाड़ी पर बांकल माता का प्राचीन देवी मन्दिर धार्मिक आस्था का प्रमुख स्थल है। देवी मन्दिर धार्मिक आस्था का प्रांगण से बाड़मेर का विहंगम दृश्य, आस-पास की पर्वत श्रृंखलाएँ, मैदानी भाग एवं सुरम्य घाटियाँ दृष्टिगोचर होती हैं। पहाड़ी की सीढीयों के मार्ग पर ही नागणेची देवी का मन्दिर भी प्राचीन एवं शक्ति उपासकों का प्रमुख स्थान है।
2. श्री पार्श्वनाथ जैन मन्दिर :- बांकल माता देवी की तलहटी में प्रारम्भिक सीढीयों के पास ही शहर के कोने पर 12 वीं शताब्दी में निर्मित श्री पार्श्वनाथ जैन मन्दिर में शिल्पकला के अतिरिक्त काँच, जड़ाई का कार्य एवं चित्रकला दर्शनीय है। स्टेशन रोड़ से सीधे बाजार होते हुए जैन मन्दिर तक पहुंचा जा सकता है।
3. शिव मुण्डी महादेव मन्दिर :- बाड़मेर शहर के पश्चिमी भाग में स्थित सुरम्य पहाडि़यों में सबसे ऊंची चोटी पर स्थित प्राचीन शिव मन्दिर एक रमणीय एवं धार्मिक स्थल है। ऊंची पहाड़ी से शहर का विहंगम दृश्य, सूर्यास्त दर्शन एवं प्राकृतिक सौन्दर्य देखने योग्य है।
4. पीपला देवी, दक्षिणायनी देवी एवं गणेश मन्दिर :- बाड़मेर की सुरम्य पहाडि़यों के मध्य घाटियों में निर्मित पीपला देवी, गणेश मन्दिर एवं दक्षिणायनी मन्दिर उपासना के साथ ही स्थानीय लोगो के लिए आमोद-प्रमोद हेतु रमणीय स्थल है। घाटी में स्थित जलकुण्ड के आस-पास पार्क निर्माण के साथ पर्यटक सुविधाओं का विकास भी किया गया है।
5. सोहननाड़ी ताल :- सुरम्य पहाडि़यों के मध्य में स्थित प्राचीन ताल सोहननाड़ी का निर्माण बाड़मेर नगर की स्थापना के साथ ही करवाया गया था, जो पूर्व में नगरीय जन जीवन के लिए पानी का एक मात्र स्त्रोत था। वर्तमान में नलों द्वारा जल वितरण की व्यवस्था होने से ऐतिहासिक तालाब की उपयोगिता एवं महत्व में कमी आई है। परम्परागत जल स्त्रोतों को पर्यटन हेतु रमणीय हेतु रमणीक स्थल के रूप में विकसित किया गया है।
6. जसदेर नाड़ी तालाब :- बाड़मेर शहर से करीब 3 किलोमीटर दूर उत्तरलाई मार्ग पर स्थित प्राचीन कृत्रिम तालाब जसदेर नाड़ी का निर्माण बरसाती पानी को संग्रहित कर उपयोग में लेने हेतु करवाया गया था, जो आस-पास के गांवो के लिए प्रमुख जल स्त्रोत रहा है। जिसका उपयोग निरन्तर है, उसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा हैं। यहाँ शिव शक्ति धाम मन्दिर स्थल एवं उपासना का स्थल है।
7. सफेद आंकड़ा महादेव मन्दिर :- बाड़मेर से मात्र 3 किलोमीटर दूर सफेद आंकड़ा महादेव मन्दिर स्थानीय निवासियों के लिए उपासना स्थल है।
8. महाबार धोरा :- बाड़मेर से 5 किलोमीटर दूर रेतीले धोरे, सूर्योदय एवं सूर्यास्त दर्शन एवं केमल सवारी हेतु आकर्षक स्थल है।